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मानसून में बढ़ रहे हैं टाइफाइड, डेंगू और एच1एन1 के मामले, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

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ADHUNIK NEWS ,29 August 2026, (Update 6 October 2026, 11:09 PM UTC)
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मानसून का मौसम राहत तो लाता है, लेकिन बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। देश के कई शहरों में टाइफाइड, डेंगू, मलेरिया और एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जलभराव, गंदा पानी और मच्छरों के बढ़ते प्रजनन के कारण पानी और भोजन से फैलने वाले संक्रमण आम हो गए हैं।

पानी की मिलावट और मच्छरों से बचने के उपाय अपनाएं, लापरवाही पड़ सकती है भारी
मानसून का मौसम राहत तो लाता है, लेकिन बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। देश के कई शहरों में टाइफाइड, डेंगू, मलेरिया और एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जलभराव, गंदा पानी और मच्छरों के बढ़ते प्रजनन के कारण पानी और भोजन से फैलने वाले संक्रमण आम हो गए हैं।

टाइफाइड के मामले सबसे ज्यादा
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मानसून के दौरान टाइफाइड सबसे ज्यादा पुष्टि होने वाला बुखार बन गया है। कुछ लैब टेस्ट में लगभग हर चौथा सैंपल पॉजिटिव आ रहा है। गुरुग्राम और अन्य शहरों के डॉक्टर बता रहे हैं कि पानी और भोजन में सीवेज की मिलावट के कारण टाइफाइड के केस बढ़े हैं। मरीजों में लंबे समय तक बुखार, पेट दर्द, कमजोरी और कभी-कभी कब्ज या दस्त की शिकायत आम है।
डेंगू के मामले भी भारी बारिश के बाद ऊपर की ओर हैं। कई जिलों में पुष्टि किए गए डेंगू केस बढ़ रहे हैं, जबकि मलेरिया अपेक्षाकृत नियंत्रण में है।

दिल्ली में एच1एन1 का दबाव
दिल्ली में इस साल एच1एन1 के हजारों मामले दर्ज हो चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया है कि स्थिति नियंत्रण में है और मानसून खत्म होने के साथ केस कम होने की उम्मीद है। अस्पतालों में आइसोलेशन बेड तैयार रखे गए हैं। ज्यादातर मरीज आम बुखार और फ्लू जैसे लक्षणों के साथ आ रहे हैं और जल्द डिस्चार्ज हो जा रहे हैं।

कैसे बचें इन बीमारियों से?

  • डॉक्टर निम्नलिखित सावधानियों पर जोर दे रहे हैं:
  • पीने का पानी हमेशा उबालकर या फिल्टर करके इस्तेमाल करें।
  • बाहर का कच्चा खाना, कटिंट फ्रूट और गंदे पानी से बनी चीजें避免 करें।
  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले और टायर में जमा पानी साफ करते रहें।
  • मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और दिन-रात दोनों समय मच्छर भगाने वाली क्रीम लगाएं।
  • बुखार आने पर खुद से एंटीबायोटिक न लें। डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवा शुरू करें।
  • हाथ बार-बार धोएं और व्यक्तिगत स्वच्छता का ख्याल रखें।

सकारात्मक खबर भी है
केंद्र सरकार के अनुसार, भारत में 2015 से 2025 के बीच मलेरिया के मामलों और मौतों में लगभग 80 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। उच्च बोझ वाले जिले भी काफी कम हो गए हैं। यह लक्षित नियंत्रण उपायों की सफलता को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में सतर्कता बरतने से ज्यादातर बीमारियों से बचा जा सकता है। अगर बुखार तीन-चार दिन से ज्यादा रहे, कमजोरी बढ़े या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सही समय पर जांच और इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

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