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जर्मनी में ऐतिहासिक राजनीतिक भूकंप: AfD ने सक्सोनी-आनहाल्ट में भारी जीत दर्ज की, लेकिन बहुमत से चूकी

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ADHUNIK NEWS ,7 September 2026, (Update 5 October 2026, 5:47 AM UTC)
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जर्मनी के के पूर्वी राज्य सक्सोनी-आनहाल्ट (Saxony-Anhalt) के विधानसभा चुनाव में दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। 6 सितंबर 2026 को हुए चुनाव के आधिकारिक प्रारंभिक नतीजों के मुताबिक, AfD को 43.8 प्रतिशत वोट मिले हैं।

जर्मनी के के पूर्वी राज्य सक्सोनी-आनहाल्ट (Saxony-Anhalt) के विधानसभा चुनाव में दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। 6 सितंबर 2026 को हुए चुनाव के आधिकारिक प्रारंभिक नतीजों के मुताबिक, AfD को 43.8 प्रतिशत वोट मिले हैं। यह पार्टी का अब तक का सबसे बड़ा राज्य स्तरीय प्रदर्शन है और 2021 के चुनाव में मिले 20.8 प्रतिशत वोट से दोगुना से भी ज्यादा।

83 सदस्यीय विधानसभा में AfD को 39 सीटें मिली हैं। पूर्ण बहुमत के लिए 42 सीटें जरूरी थीं, यानी पार्टी सिर्फ तीन सीटों से चूक गई। चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की कंजरवेटिव पार्टी CDU को महज 17.2 प्रतिशत वोट और 15 सीटें मिलीं। यह CDU का राज्य में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन है। पहले CDU यहां लंबे समय से सत्ता में थी।

अन्य पार्टियों का प्रदर्शन

  • एसपीडी (SPD): 9.3 प्रतिशत, 8 सीटें
  • ग्रीन्स: 8.9 प्रतिशत, 8 सीटें
  • द लेफ्ट (Die Linke): 8.6 प्रतिशत, 8 सीटें
  • बीएसडब्ल्यू (Sahra Wagenknecht Alliance): 5.3 प्रतिशत, 5 सीटें
  • एफडीपी: 2.6 प्रतिशत (पांच प्रतिशत की सीमा पार नहीं कर पाई, बाहर)

मतदान प्रतिशत लगभग 77.8 प्रतिशत रहा, जो जर्मनी के एकीकरण के बाद राज्य में सबसे ज्यादा है।

क्यों बड़ी है ये जीत?
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी जर्मन राज्य में इतने बड़े अंतर से सबसे बड़ी ताकत बनी है। AfD को राज्य की खुफिया एजेंसी “सुनिश्चित दक्षिणपंथी चरमपंथी” संगठन मानती है। पार्टी इमिग्रेशन, शरणार्थी नीति, राष्ट्रीय पहचान और मौजूदा सरकारों की नीतियों के खिलाफ तीखे रुख के लिए जानी जाती है। पूर्वी जर्मनी में महंगाई, बेरोजगारी और मुख्यधारा की पार्टियों से नाराजगी का फायदा AfD को खूब मिला।
राष्ट्रीय स्तर पर भी AfD हालिया सर्वे में करीब 28 प्रतिशत समर्थन के साथ सबसे लोकप्रिय पार्टी बनी हुई है, जबकि CDU/CSU करीब 20 प्रतिशत पर है।

सरकार बनाना मुश्किल
सबसे ज्यादा सीटें होने के बावजूद AfD के लिए सत्ता आसान नहीं। CDU, SPD, ग्रीन्स और अन्य पार्टियां साफ कह चुकी हैं कि वे AfD के साथ किसी भी तरह का गठबंधन नहीं करेंगी। इसे जर्मनी में “फायरवॉल” नीति कहा जाता है। बिना AfD के बहुमत बनाने के लिए बाकी सभी पार्टियों (CDU + SPD + ग्रीन्स + लेफ्ट + BSW) को एक साथ आना होगा, जो बेहद जटिल है।
AfD के मुख्य उम्मीदवार उलरिश जिगमुंड (Ulrich Siegmund, उम्र 35) ने कहा कि लोगों ने साफ संदेश दिया है कि वे बदलाव चाहते हैं। उन्होंने अल्पमत सरकार बनाने से इनकार किया और कहा कि जरूरत पड़ी तो नए चुनाव कराए जा सकते हैं। पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं ने भी इसे शासन का जनादेश बताया है।

उलरिश जिगमुंड कौन हैं?
जिगमुंड 2016 से राज्य विधानसभा के सदस्य हैं। उनकी छवि पार्टी के अन्य कट्टर नेताओं की तुलना में अपेक्षाकृत नरम और युवा आकर्षित करने वाली मानी जाती है। सोशल मीडिया पर उनकी अच्छी पकड़ है। उन्होंने नतीजों के बाद कहा कि यह 2029 के राष्ट्रीय चुनाव से पहले एक अहम कदम है।

प्रतिक्रियाएं
रूस के राष्ट्रपति पुतिन के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव ने इसे ऐतिहासिक बताया।
फ्रांस ने इसे पूरे यूरोप के लिए गंभीर समय करार दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनाव के अनुमानित नतीजों की तस्वीर शेयर की, लेकिन सीधे AfD का समर्थन नहीं किया।
AfD पर नाजी नारों के इस्तेमाल, होलोकॉस्ट को कमतर आंकने और मुस्लिमों-प्रवासियों के खिलाफ तीखे बयानों के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। पार्टी इन आरोपों से इनकार करती है।
यह नतीजा जर्मन राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। मुख्यधारा की पार्टियां अब सोचने पर मजबूर हैं कि वोटरों की नाराजगी को कैसे संभाला जाए। सक्सोनी-आनहाल्ट में सरकार बनाने की प्रक्रिया अब लंबी और जटिल होने वाली है।

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